वन्य जीव संरक्षण मोर का भाई खरमोर
मोर का भाई खरमोर
मैं समझता हूं कि हम सभी ने मोर को कभी न कभी तस्वीरों से अलग आमने-सामने जरूर देखा होगा। कुछ खुशनसीब लोगों ने मोर को पंख फैलाकर नाचते हुए भी देखा होगा। लेकिन, क्या हममें से किसी ने खरमोर को भी देखा है। जी हां, नीचे जिस पक्षी की तस्वीर आप देख रहे हैं वह खरमोर यानी लेसर फ्लोरिकन है। भारत के चार राज्यों में बस अब 264 खरमोर ही बचे हैं। बाकी कहां गए ???
भारत में बस्टर्ड फैमिली के पक्षियों की चार प्रजातियां पाई जाती हैं। लेसर फ्लोरिकन यानी खरमोर उसमें सबसे छोटा होता है। सबसे बड़ा बस्टर्ड यानी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावण भारत में अब मुश्किल से सौ बचा है। पता नहीं हम उसे बचा पाने में कामयाब हो पाएंगे या नहीं। दूसरी तरफ, हमारी अलग-अलग कारगुजारियों के चलते खरमोर भी विलुप्त होने की कगार पहुंच चुका है। भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा कुछ महीनों पहले जारी आंकड़ों के मुताबिक खरमोर की आबादी में वर्ष 2000 की तुलना में 80 फीसदी की गिरावट आई है। उस समय इसकी संख्या साढ़े तीन हजार के लगभग आकी गई थी। लेकिन, अब इसमें भारी गिरावट आई है और यह सिर्फ 264 के लगभग ही रह गई है।
खरमोर को सबसे पहले 1782 में रिकार्ड किया गया था। उस समय यह पक्षी पूरे भारत में पाया जाता था। गुजरात से बंगाल तक, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से लेकर मैनपुरी से लेकर दक्षिण में तिरुअनंतपुरम तक यह पक्षी पाया जाता था। इसके अलावा, नेपाल और पाकिस्तान के तराई वाले इलाके में और बांग्लादेश और म्यांमार में भी यह पक्षी पाया जाता था। लेकिन, लगभग ढाई सौ सालों में यह पक्षी विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गया है।
इसकी आबादी सिमटकर रह गई है। अब यह राजस्थान के चार जिलों, गुजरात के पांच जिलों, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के चार-चार जिलों और आंध्रप्रदेश के एक जिले में ही पाया जाता है।
खरमोर की आबादी समाप्त होने के पीछे कई कारणों को जिम्मेदार माना जाता है। एक तो खाने के लिए इस पक्षी का जमकर शिकार किया गया। फिर खेती में कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग के चलते कीटों की संख्या बेहद कम होती जा रही है। इसके चलते पक्षी के सामने पेट भरने की समस्या पैदा हो गई है। यह घसियाले मैदानों में रहने वाला पक्षी है और इसके रहवास में ज्यादा से ज्यादा अब खेती होने लगी है। इससे इस पक्षी को रहने के लिए जगह नहीं मिल रही है। घसियाले मैदानों में जमीन पर ही यह अपने घोसले बनाता है। लेकिन, आवारा कुत्ते अब उन घोसलों को नष्ट कर देते हैं या उनका शिकार कर लेते हैं।
कई पक्षियों में मादा को रिझाने के लिए नर बड़े अनूठे तरीके अपनाते हैं। जैसे नर मोर मादा को रिझाने के लिए अपने पंखों को फैलाकर लहरियां लेता है, जैसे नृत्य कर रहा हो। ऐसे ही खरमोर भी मादा को रिझाने के लिए बड़ा निराला तरीका अपनाते हैं। वे अपनी जगह से चार-पांच मीटर तक की ऊंचाई वाली छलांगे भरते हैं। इस दौरान वे टिट्कारी लेकर मेढक जैसी टर्र-टर्र की आवाज भी निकालते हैं। इस आवाज को चार-पांच सौ मीटर की दूरी से सुना जा सकता है। नर खरमोर की इस अदा पर मादा रीझ जाती है और उसे अपना साथी चुन लेती है। खरमोर के इस अनोखे नृत्य को मेटिंग डिस्प्ले कहा जाता है। आप चाहें तो यूट्यूब पर जाकर इसे देख भी सकते हैं। सच कह रहा हूं, देखकर आपको मजा आएगा।
लेकिन, अपनी हीरोइन को रिझाने का यह अंदाज भी खरमोर पर भारी पड़ता जा रहा है। दुनिया जहान के पक्षी प्रेमी इस डिस्प्ले को देखने के लिए मानसून का इंतजार करते हैं। कई बार उनके शोर-शराबे के चलते खरमोर का ध्यान भंग हो जाता है और वह अपने प्रेम के लिए वैसी कूदान नहीं लगा पाता, जैसी लगाने की उसे जरूरत होती है। इसलिए प्रेम का वह निमंत्रण अनसुना ही रह जाता है।
मैं सोचता हूं कि अगर इस पक्षी को इस तरह से दुश्मनों की तरह खतम नहीं किया जाता तो शायद मैंने भी कभी तस्वीरों से अलग इसका आमने-सामने से दीदार किया होता। लेकिन, अब तो खतरा इसके सिर्फ तस्वीरों में ही बचे रहने का हो गया है।
आइये, इस खूबसूरत पक्षी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानें और दूसरों को भी बताएं !!!
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