आज करे तो सब अब कर
आज नहीं, अभी नहीं तो कभी नहीं।
बचपन मे एक दोहा सुना था।
"काल करे सो आज कर, आज करे सो अब ।।
पल में प्रलय होयेगी, बहुरि करेगा कब?"
इसका अर्थ समझने में थोड़ी देर हुई। इसका ये अर्थ नहीं है कि कल प्रलय आ जाएगी और आपका काम अधूरा रह जाएगा। हम यही सोचा करते थे कि प्रलय आ जाएगी तो काम की ज़रूरत भी तो ख़त्म हो जाएगी, तो क्यों करें?
इसका अर्थ है, कि अगर आज काम, नहीं कर रहे है, अभी नहीं कर रहे है तो कल तक शायद वो उत्साह ना रहे, या कल तक शायद परिस्थिति ऐसी हो जाए कि आप चाहकर भी वो काम कर ना पाए, जो आप दिल से करना चाहते थे और आपने कल पर टाल रखा था।
उठिए और लग जाइए, कहीं बाद में बस पछताना पड़े कि वक़्त नहीं मिलता।
मेहनत करने का मन नहीं है तो मेहनत का दिखावा करो। कुछ देर बाद मन ख़ुद ब ख़ुद लग जाएगा।
कभी आजमा कर देखियेगा, जब आपका बिल्कुल मन ना हो पढ़ने का, तब केवल रीडिंग करने के लिए बुक लेकर बैठ जाइये। और बस, बिना किसी दबाव के रीडिंग कीजिए।
आप देखेंगे कि पन्द्रह से बीस मिनट के अंदर ही आपका उत्साह वापस आ जाएगा।
ये है दिमाग़ को बहकाकर अपनी बात मनवाने का तरीका।
अपनी शुरुआत को याद कीजिए। वो सारी वज़ह, जिनके लिए आपने के शुरुआत की थी।
मोटिवेशन के लिए किसी और का मुख ना देखें, ना ही कोई क़िताब या वीडियो से किसी उत्साह की उम्मीद करें। बाहर से आया हुआ मोटिवेशन क्षणिक होता है। असल मोटिवेशन तो आपका वो सपना है, जिसके लिए आपने ये शुरुआत की है।
भविष्य की सोचना बंद कर दीजिए।
वर्तमान ही भविष्य की नींव है। अगर आप आज के कर्म ख़राब करके केवल भविष्य की योजनाएं बना रहे है तो आपकी ये योजनाएं पहले ही विफ़ल हो चुकी है।
वर्तमान की सोचिए, वर्तमान के लक्ष्य और वर्तमान के परिणाम पर काम कीजिए। भविष्य ख़ुद सँवर रहा होगा।
उत्साह बनाये रखने के लिए थोड़ा अपनी रुचियों पर भी ध्यान देते रहना चाहिए। जिस तरह शरीर को भोजन से मिली ऊर्जा की ज़रूरत है, उसी तरह दिमाग़ को भी मन की शांति रूपी ऊर्जा ज़रूरी है।
स्रोत:- व्यक्तिगत असफलताओं से मिली सीख।
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